हजारों छोटे दुकानदारों को जुर्माना भुगतने की मानसिक वेदना से मिली मुक्ति

रायपुर, 12 अक्टूबर  2008 लगभग 69 वर्ष पुराने तम्बाखू अधिनियम को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस वर्ष समाप्त कर दिए जाने के फलस्वरूप राज्य के उन हजारों छोटे कारोबारियों, किराना दुकानदारों और पान ठेलों के जरिए परिवार का गुजर बसर करने वालों को काफी राहत मिली है। इनमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जिनकी दिन भर की आमदनी मुश्किल से एक सौ से डेढ़ सौ रूपए तक होती है, लेकिन इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत लायसेंस नहीं लेने पर उनको जुर्माना भुगतना पड़ता था। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा कुछ महीने पहले लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के फलस्वरूप अब उन्हें जुर्माना भरने की मानसिक वेदना से मुक्ति मिल गई है। ऐसे लाभान्वितों की संख्या 75 हजार से भी अधिक होने का अनुमान है।
 
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 1939 से ही मध्य प्रान्त और बरार तम्बाखू अधिनियम 1939 प्रचलित था, लेकिन छोटे कारोबारियों और दुकानदारों को इस अधिनियम के चलते कई प्रकार की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इस अधिनियम के तहत तम्बाखू और उस पर आधारित उत्पादों की बिक्री के लिए राज्य के व्यापारियों को आबकारी विभाग से लायसेंस लेना पड़ता था। तम्बाखू लायसेंस जिला स्तर के आबकारी अधिकारी द्वारा जारी किया जाता था, जिसकी अवधि हर साल एक अक्टूबर से 30 सितम्बर तक होती थी। आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा तम्बाखू लायसेंस की जांच में किसी पान ठेले वाले के पास या किराना दुकानदार के पास लायसेंस नहीं मिलने पर प्रकरण दर्ज कर उसका चालान करते हुए मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता था। अधिकांश मामलों में न्यायालय द्वारा जुर्माना किया जाता था। छोटे कारोबार के लिए लायसेंस की औपचारिकता पूरी नहीं कर पाने पर संबंधित पान ठेले के संचालक और किराना दुकानदार अक्सर मानसिक तनाव में रहते थे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से इसके सभी पहलुओं पर विचार किया और वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग को इस अधिनियम की समाप्ति के लिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। इस अधिनियम के तहत लगाए जाने वाले जुर्माने से राज्य शासन को भी नाममात्र का राजस्व मिलता था।
 
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप वाणिज्यिक कर विभाग ने अधिनियम को निरस्त कर दिया। लगभग पांच महीने पहले विगत नौ मई को इस आशय की अधिसूचना भी छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई। अब छत्तीसगढ़ के व्यापारियों को तम्बाखू उत्पादों के व्यवसाय के लिए ना तो लायसेंस लेने की जरूरत है और ना ही आबकारी विभाग में इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क जमा करने की जरूरत होगी।
 
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